Arvind Singh : कृषि विज्ञान केंद्र, रोहतास द्वारा दिनांक 5 से 9 जनवरी 2023 तक पांच दिवसीय, ग्रामीण युवकों एवं युवतियों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्मी कंपोस्ट उत्पादन तकनीक एवं बाजारीकरण पर अयोजन किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान आर के जलज ने कहा की उर्वरकों के दुष्परिणाम भयावह रूप में सामने आ रहे हैं। अतः किसानों को जैविक खाद का प्रयोग अपने खेतों में निश्चित रूप से करना चाहिए। इसके प्रयोग से खेती की लागत में कमी आएगी और उत्पाद की गुणवत्ता में बढ़ोतरी होगी।
कार्यक्रम में उपस्थित मृदा वैज्ञानिक डॉ रमाकांत सिंह ने विस्तार पूर्वक गोबर से वर्मी कंपोस्ट एवं इनरिच्ड वर्मी कंपोस्ट बनाने के तरीको पर प्रशिक्षित किया। उन्होंने बताया कि 60 से 90 दिनों में वर्मी कंपोस्ट पूरी तरह से गोबर से तैयार किया जा सकता है वर्मी कंपोस्ट में नाइट्रोजन 2.0 प्रतिशत, फास्फोरस प्रतिशत 1.5%, पोटाश 1% के अलावा सभी सूक्ष्म पोषक तत्व और हारमोंस की उपस्थिति होती है जिससे यह पौधों में संपूर्ण बढ़वार करता है और पौध के ऊपर रोग व्याधि की समस्या में कमी होती है।
गोबर के अलावे फसल अवशेष, पराली, किचन से निकले हुए पदार्थ एवं अन्य जैविक अपशिष्ट से वर्मी कंपोस्ट बनाया जा सकता है। डॉ रतन कुमार उद्यान वैज्ञानिक ने वर्मी कंपोस्ट के पपीता सब्जी एवं फलदार वृक्षोंमें कितना और किस प्रकार से प्रयोग किया जाए इसके बारे में विस्तार पूर्वक बताया। उनके अनुसार शहरी क्षेत्रों में भी अपने खाने हेतु गमलों में भी सब्जियां एवं मौसमी साग उत्पादन करना चाहिए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 कृषकों ने भाग लिया। जिनमें पूनम देवी, कविता देवी, कृष्णा देवी, जलिया देवी इत्यादि उपस्थित रहे।