महाराष्ट्र संकट : उधर शिंदे ले उड़े 30 विधायक, इधर उद्धव की मीटिंग से भी लापता हो गए कई माननीय

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सेंट्रल डेस्क/मुंबई। एकनाथ शिंदे की बगावत और शिवसेना व अन्य पार्टियों, निर्दलीय विधायकों को मिला कर कुल 30 की टोली पहले ही महाराष्ट्र सरकार पर संकट बनकर मंडरा रही है। और इस मंडली ने डेरा डाला हुआ है गुजरात के सूरत में। उधर, टोली ली मेरेडियन होटल में आराम फरमा रही है। इधर, उद्धव ठाकरे की नींद हराम है।

ऐसे संकट काल में उन्होंने बात करने के लिए मंगलवार की दोपहर मीटिंग बुलाई थी, लेकिन इसमें करीब 20 विधायक ही शामिल हुए। करीब 35 विधायक मीटिंग में नहीं आए। इस पर उद्धव ठाकरे सरकार की चिंता बढ़ गई है। शिवसेना के कुल 55 विधायक हैं और यदि पार्टी से 27 अलग हो जाते हैं तो फिर उन पर दल-बदल का कानून लागू नहीं होगा। ऐसे में उद्धव ठाकरे की मीटिंग से 35 विधायकों का दूर रहना बड़े बदलाव का सूचक हो सकता है।

हालांकि शिवसेना अब डैमेज कंट्रोल में जुटी है। एक तरफ एकनाथ शिंदे को उसने विधायक दल के नेता के पद से हटाकर अजय चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं कुछ देर में शक्ति प्रदर्शन की भी बात कही है। ताजा घटनाक्रम पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने भी अपनी पार्टी का रुख कुछ स्पष्ट नहीं किया। उन्होंने बल्कि हिंट दिया कि इस बार भाजपा कोई जल्दबाजी नहीं दिखाने वाली। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र बुलाने की स्थितियां फिलहाल नहीं हैं। पर यह राजनीति है, कभी भी, कुछ भी हो सकता है। उद्धव ठाकरे की मीटिंग में शिवसेना के ही 35 विधायकों के न पहुंचने से बीजेपी नेता का दावा मजबूत दिखा।

महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के 106 विधायक हैं और उसे 13 अन्य निर्दलीय नेताओं का समर्थन हासिल है। यानी उसके साथ खड़े हैं 119 विधायक ऐसे में यदि उसे 26 विधायक सपोर्ट करते हैं तो वह सरकार बनाने के लिए जरूरी जादुई आंकड़े तक पहुंच सकती है।